Saturday, October 4, 2014

एक संवाद लंकेश के साथ

"एक संवाद लंकेश के साथ" 

कल सुबह-सुबह रास्ते में एक दस सिर वाला हट्टा कट्टा बंदा अचानक मेरी बाइक के आगे आ गया। जैसे तैसे ब्रेक लगाई और पूछा..

क्या अंकल 20-20 आँखें हैं..फिर भी दिखाई नहीं देता ?
जवाब मिला- थोड़ा तमीज से बोलो, हम लंकेश्वर रावण हैं !

ओह अच्छा ! तो आप ही हो श्रीमान रावण ! एक बात बताओ..ये दस-दस मुंह संभालने थोड़े मुश्किल नहीं हो जाते ? मेरा मतलब शैम्पू वगैरह करते टाइम..यू नो...और कभी सर दर्द शुरू हो जाए तो पता करना मुश्किल हो जाता होगा कि कौनसे सर में दर्द हो रहा है...?

रावण- पहले ये बताओ तुम लोग कैसे डील करते हो इतने सारे मुखोटों से ? हर रोज चेहरे पे एक नया मुखोटा , उस पर एक और मुखोटा , उस पर एक और ! यार एक ही मुंह पर इतने नकाब...थक नहीं जाते ?

अरे-अरे आप तो सिरियस ले गए...मै तो वैसे ही... अच्छा ये बताओ मैंने सुना है आप कुछ ज्यादा ही अहंकारी हो? 
रावण- हाहाहाहाहाहाहा

अब इसमे हंसने वाली क्या बात थी , कोई जोक मारा क्या मैंने ? 

रावण- और नहीं तो क्या...एक 'कलियुगी इन्सान' के मुंह से ये शब्द सुनकर हंसी नहीं आएगी तो और क्या होगा ? तुम लोग साले एक छोटी मोटी डिग्री क्या ले लो, अँग्रेजी के दो-पवरी  अक्षर क्या सीख लो, यूं इतरा के चलते हो जैसे तुमसे बड़ा ज्ञानी कोई है ही नहीं इस धरती पे ! एक तुम ही समझदार ,बाकी सब गँवार ! और मैंने चारों वेद पढ़ के उनपे टीका टिप्पणी तक कर दी ! चंद्रमा की रोशनी से खाना पकवा लिया ! इतने-इतने कलोन बना डाले, दुनिया का पहला विमान और खरे सोने की लंका बना दी ! तो थोड़ा बहुत घमंड कर भी लिया तो कौन आफत आ पड़ी... हैं?

चलो ठीक है बॉस,ये तो जस्टिफ़ाई कर दिया आपने, लेकिन...लेकिन गुस्सा आने पर बदला चुकाने को किसी की बीवी ही उठा के ले गए ! ससुरा मजाक है का ? बीवी न हुई छोटी मोटी साइकल हो गयी...दिल किया, उठा ले गए बताओ !

(एक पल के लिए रावण महाशय तनिक सोच में पड़ गए, मेरे चेहरे पर एक विजयी मुस्कान आने ही वाली थी कि फिर वही इरिटेटिंग अट्टहास )

हाहाहाहाहाहहह लुक हू इज़ सेइंग ! अबे मैंने श्री राम की बीवी को उठाया, मानता हूँ बहुत बड़ा पाप किया और उसका परिणाम भी भुगता ,पर मेघनाथ की कसम-कभी जबरदस्ती दूर...हाथ तक नहीं लगाया,उनकी गरिमा को रत्ती भर भी ठेस नहीं पहुंचाई और तुम.. तुम कलियुगी इन्सान !! छोटी-2 बच्चियों तक को नहीं बख्शते ! अपनी हवस के लिए किसी भी लड़की को शिकार बना लेते हो...कभी जबरदस्ती तो कभी झूठे वादों,छलावों से ! अरे तुम दरिंदों के पास कोई नैतिक अधिकार बचा भी है भी मेरे चरित्र पर उंगली उठाने का ?? फोकट में ही !

इस बार शर्म से सर झुकाने की बारी मेरी थी...पर मै भी ठहरा पक्का 'इन्सान' ! मज़ाक उड़ाते हुए बोला...अरे जाओ-जाओ अंकल ! दशहरा कल ही है, सारी हेकड़ी निकाल देंगे देखना 
(और इस बार लंकवेशवर जी इतनी ज़ोर से हँसे कि मै गिरते-गिरते बचा !)

यार तुम तो नवजोत सिंह सिद्धू के भी बाप हो ,बिना बात इतनी ज़ोर-2 से काहे हँसते हो...ऊपर से एक भी नहीं दस-दस मुंह लेके, कान का पर्दा फाड़ दो, जरा और ज़ोर से हंसो तो !

रावण- यार तुम बात ही ऐसी करते हो । वैसे कमाल है तुम इन्सानो की भी..विज्ञान में तो बहुत तरक्की कर ली पर कॉमन सैन्स ढेले का भी नहीं ! हर साल मेरा पुतला भर जला के खुश हो जाते हो ़......घुटन मुझे होती है तुम लोगों का लैवल देख कर...मतलब जानते नही दशहरा का ,बदनाम मुझे हर साल फालतू मे करते हो

किसी दिन टाइम निकाल कर तुम सब अपने अंदर के रावण को देख सको तो 
पता चले की क्या तुम मुझे जलाने लायक हो ??

जलाना छोडो ! तुम आज के तुच्छ इन्सान मेरे पैर छुने लायक नही..  

बाकी दिल बहलाने को कुछ ही करो 
Chalo Enjoy Happy Dushera...

ये बोल कर रावण अकंल निकल लिये लेकिन मुझे मेरा लैवल समझा गये । 

दूसरों का कार्य करना, ईश्वर का कार्य करने के के बराबर होता है

एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन भ्रमण पर निकले तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राहमण को भिक्षा मागते देखा अर्जुन को उस पर दया आ गयी और उन्होंने उस ब्राहमण को स्वर्ण मुद्राओ से भरी एक पोटली दे दी जिसे पाकर ब्राहमण ख़ुशी ख़ुशी घर लौट चला पर राह में एक लुटेरे ने उससे वो पोटली छीन ली !

ब्राहमण दुखी होकर फिर से भिक्षावृत्ति में लग गया अगले दिन फिर अर्जुन की दृष्टि जब उस ब्राहमण पर पड़ी तो उन्होंने उससे इसका कारण पूछा ब्राहमण की व्यथा सुनकर उन्हें फिर से उस पर दया आ गयी और इस बार उन्होंने ब्राहमण को एक माणिक दिया !

ब्राहमण उसे लेकर घर पंहुचा और चोरी होने के डर से उसे एक घड़े में छिपा दिया और दिन भर का थका मांदा होने के कारण उसे नींद आ गयी इस बीच ब्राहमण की स्त्री उस घड़े को लेकर नदी में जल लेने चली गयी और जैसे ही उसने घड़े को नदी में डुबोया वह माणिक भी जल की धरा के साथ बह गया !


ब्राहमण को जब यह बात पता चली तो अपने भाग्य को कोसता हुआ वह फिर भिक्षावृत्ति में लग गया | अर्जुन और श्री कृष्ण ने जब फिर उसे इस दरिद्र अवस्था में उसे देखा तो जाकर सारा हाल मालूम किया इस पर अर्जुन भी निराश हुए मन की मन सोचने लगे इस अभागे ब्राहमण के जीवन में कभी सुख नहीं आ सकता ! अब यहाँ से प्रभु की लीला प्रारंभ हुई
उन्होंने उस ब्राहमण को दो पैसे दान में दिए !

तब अर्जुन ने उनसे पुछा “प्रभु मेरी दी मुद्राए और माणिक भी इस अभागे की दरिद्रता नहीं मिटा सके तो इन दो पैसो से इसका क्या होगा” यह सुनकर प्रभु बस मुस्कुरा भर दिए और अर्जुन से उस ब्राहमण के पीछे जाने को कहा !

रास्ते में ब्राहमण सोचता हुआ जा रहा था कि दो पैसो से तो एक व्यक्ति के लिए भी भोजन नहीं आएगा प्रभु ने उसे इतना तुच्छ दान क्यों दिया ! तभी उसे एक मछुवारा दिखा जिसके जाल में एक मछली तड़प रही थी ब्राहमण को उस मछली पर दया आ गयी उसने सोचा इन दो पैसो से पेट कि आग तो बुझेगी नहीं क्यों न इस मछली के प्राण ही बचा लिए जाये यह सोचकर उसने दो पैसो में उस मछली का सौदा कर लिया और मछली को अपने कमंडल में डाल दिया कमंडल के अन्दर जब मछली छटपटई तो उसके मुह से माणिक निकल पड़ा ब्राहमण ख़ुशी के मारे चिल्लाने लगा "मिल गया मिल गया ”..!!!

तभी भाग्यवश वह लुटेरा भी वहा से गुजर रहा था जिसने ब्राहमण की मुद्राये लूटी थी उसने सोचा कि ब्राहमण उसे पहचान गया और अब जाकर राजदरबार में उसकी शिकायत करेगा इससे डरकर वह ब्राहमण से रोते हुए क्षमा मांगने लगा और उससे लूटी हुई सारी मुद्राये भी उसे वापस कर दी यह देख अर्जुन प्रभु के आगे नतमस्तक हुए बिना नहीं रह सके!

वास्तव में जब आप दूसरे का भला कर रहे होते हैं, तब आप ईश्वर का कार्य कर रहे होते हैं।

Thursday, September 11, 2014

श्रीकृष्ण कहते हैं- "तुम पाँचों भाई वन में जाओ और जो कुछ भी दिखे वह मुझे बताओ, मैं तुम्हें उसका प्रभाव बताऊँगा

श्रीकृष्ण कहते हैं- "तुम पाँचों भाई वन में जाओ और जो कुछ भी दिखे वह आकर मुझे बताओ। मैं तुम्हें उसका प्रभाव बताऊँगा।" पाँचों भाई वन में गये। युधिष्ठिर महाराज ने देखा कि किसी हाथी की दो सूँड है। यह देखकर आश्चर्य का पार न रहा। अर्जुन दूसरी दिशा में गये। वहाँ उन्होंने देखा कि कोई पक्षी है, उसके पंखों पर वेद की ऋचाएँ लिखी हुई हैं पर वह पक्षी मुर्दे का मांस खा रहा है। यह भी आश्चर्य है ! भीम ने तीसरा आश्चर्य देखा कि गाय ने बछड़े को जन्म दिया है और बछड़े को इतना चाट रही है कि बछड़ा लहुलुहान हो जाता है। सहदेव ने चौथा आश्चर्य देखा कि छः सात कुएँ हैं और आसपास के कुओं में पानी है किन्तु बीच का कुआँ खाली है। बीच का कुआँ गहरा है फिर भी पानी नहीं है। पाँचवे भाई नकुल ने भी एक अदभुत आश्चर्य देखा कि एक पहाड़ के ऊपर से एक बड़ी शिला लुढ़कती-लुढ़कती आती और कितने ही वृक्षों से टकराई पर उन वृक्षों के तने उसे रोक न सके। कितनी ही अन्य शिलाओं के साथ टकराई पर वह रुक न सकीं। अंत में एक अत्यंत छोटे पौधे का स्पर्श होते ही वह स्थिर हो गई।

पाँचों भाईयों के आश्चर्यों का कोई पार नहीं ! शाम को वे श्रीकृष्ण के पास गये और अपने अलग-अलग दृश्यों का वर्णन किया।

युधिष्ठिर कहते हैं- "मैंने दो सूँडवाला हाथी देखा तो मेरे आश्चर्य का कोई पार न रहा।"
तब श्री कृष्ण कहते हैं- "कलियुग में ऐसे लोगों का राज्य होगा जो दोनों ओर से शोषण करेंगे। बोलेंगे कुछ और करेंगे कुछ। ऐसे लोगों का राज्य होगा। इससे तुम पहले राज्य कर लो। 

अर्जुन ने आश्चर्य देखा कि पक्षी के पंखों पर वेद की ऋचाएँ लिखी हुई हैं और पक्षी मुर्दे का मांस खा रहा है। इसी प्रकार कलियुग में ऐसे लोग रहेंगे जो बड़े-बड़े कहलायेंगे। बड़े पंडित और विद्वान कहलायेंगे किन्तु वे यही देखते रहेंगे कि कौन-सा मनुष्य मरे और हमारे नाम से संपत्ति कर जाये। संस्था के व्यक्ति विचारेंगे कि कौन सा मनुष्य मरे और संस्था हमारे नाम से हो जाये। पंडित विचार करेंगे कि कब किसका श्राद्ध है ? चाहे कितने भी बड़े लोग होंगे किन्तु उनकी दृष्टि तो धन के ऊपर (मांस के ऊपर) ही रहेगी।
परधन परमन हरन को वैश्या बड़ी चतुर। ऐसे लोगों की बहुतायत होगी, कोई कोई विरला ही संत पुरूष होगा।

भीम ने तीसरा आश्चर्य देखा कि गाय अपने बछड़े को इतना चाटती है कि बछड़ा लहुलुहान हो जाता है। कलियुग का आदमी शिशुपाल हो जायेगा। बालकों के लिए ममता के कारण इतना तो करेगा कि उन्हें अपने विकास का अवसर ही नहीं मिलेगा। किसी का बेटा घर छोड़कर साधु बनेगा तो हजारों व्यक्ति दर्शन करेंगे किन्तु यदि अपना बेटा साधु बनता होगा तो रोयेंगे कि मेरे बेटे का क्या होगा ? इतनी सारी ममता होगी कि उसे मोहमाया और परिवार में ही बाँधकर रखेंगे और उसका जीवन वहीं खत्म हो जाएगा। अंत में बिचारा अनाथ होकर मरेगा। वास्तव में लड़के तुम्हारे नहीं हैं, वे तो बहुओं की अमानत हैं, लड़कियाँ जमाइयों की अमानत हैं और तुम्हारा यह शरीर मृत्यु की अमानत है। तुम्हारी आत्मा-परमात्मपा की अमानत हैं। तुम अपने शाश्वत संबंध को जान लो बस !

सहदेव ने चौथा आश्चर्य यह देखा कि पाँच सात भरे कुएँ के बीच का कुआँ एक दम खाली ! कलियुग में धनाढय लोग लड़के-लड़की के विवाह में, मकान के उत्सव में, छोटे-बड़े उत्सवों में तो लाखों रूपये खर्च कर देंगे परन्तु पड़ोस में ही यदि कोई भूखा प्यासा होगा तो यह नहीं देखेंगे कि उसका पेट भरा है या नहीं। दूसरी और मौज-मौज में, शराब, कबाब, फैशन और व्यसन में पैसे उड़ा देंगे। किन्तु किसी के दो आँसूँ पोंछने में उनकी रूचि न होगी और जिनकी रूचि होगी उन पर कलियुग का प्रभाव नहीं होगा, उन पर भगवान का प्रभाव होगा।

पाँचवा आश्चर्य यह था कि एक बड़ी चट्टान पहाड़ पर से लुढ़की, वृक्षों के तने और चट्टाने उसे रोक न पाये किन्तु एक छोटे से पौधे से टकराते ही वह चट्टान रूक गई। कलियुग में मानव का मन नीचे गिरेगा, उसका जीवन पतित होगा। यह पतित जीवन धन की शिलाओं से नहीं रूकेगा न ही सत्ता के वृक्षों से रूकेगा। किन्तु हरिनाम के एक छोटे से पौधे से, हरि कीर्तन के एक छोटे से पौधे मनुष्य जीवन का पतन होना रूक जायेगा। 

Saturday, May 24, 2014

India does not need strong governance, but needs good care.

Almost major Indians are waiting about an upcoming golden sunrise this time, it looks good but it is not the fact exactly, because India is neither sick nor weak. The country has lost the belief, the self confidence, the morals and the cause is only Indians. Therefore, a strong governance or a good doctor cannot bring back all those. At this stage, country does not require doctors or engineers, neither IAS/IPS nor ministers, it needs good cares but really who cares?

Everybody is fighting against corruption but nobody thinks its cause. Is corruption a viral disease that came via air or water from neighbor countries? Off course no. It born here only, how? Who supported it? Answer is we only, the Indians. It born in our society only and spread across the countrywide. If it born in our society, how we didn't noticed it and why nobody tried to fight against it at that moment? The people who are extremely engaged in corruption, also an Indian as well somebody's in relation. They are not a foreign particle.

Here, every people are talking about to see their children either as a doctor, or an engineer, IAS/IPS or super star but nobody is talking that they will make their children first of all a good person. Everybody feels proud to say they are Bengali, or Marathi, or Gujrati, or Punjabi or Madrasi but nobody feels proud to say "I am an Indian". Everybody battling to convert their region to an independent state and they are enough happy with their local language only, but very few people loves to speak in common languages. All are pride to speak in English but they feel shame to speak in Hindi. This is the thinking about an Indian, then how and why we are expecting the system should be change? In this ways, even if the God himself will try to change it, it cannot possible. India has already full of everything, but if something is missing here, then it is unity, it is integrity among all Indians. If we fail to achieve it, we should not hope for anything better. Think about yourself, who is corrupt first, we or the system? Change the way of thinking before to change anything else.

Sunday, February 9, 2014

आम आदमी की समस्या कितना हल कर सकता है सि.एन.जी. के घटते दाम?

सुनने मे आया है की सि.एन.जी. की कीमत पर 15/- रुपये प्रति लीटर तक की भारी गिरावट लाई है देल्ही मे केजरीवाल सरकार ने! भाई साहब बहुत खूब, लेकिन इससे फयडा किसे होगा, सि.एन.जी से चलाने वाले कार वालों को, ऑटो वालों को या आम जनता को? सि.एन.जी की इस कीमत से अब ऑटो का किराया मे कम से कम 50% तक की गिरावट आनी चाहिए, वहीं पब्लिक बस की किराया मे कम से कम 40% तक की कमी होनी चाहिए! लेकिन ऐसा क्या होगा? एक बहुत बड़ा प्रश्ना है क्यूँ की आज तक किराया सिर्फ़ बढ़ा है, कम नही हुवा!

आम जनता को चैन तब ही आयगा जब ऑटो और बसों की बढ़ी हुवी किराया कम होगा! आम जनता को तभी चैन आयगा जब महीने की कमाई मे से वो कुछ बचा कर भविष्या के लिए रख सके! आम आदमी के पास ना तो स्विश बॅंक है और ना ही वो किसी राजनीतिक पार्टी मे शामिल है, फिर वो अपना भविष्या बनाए तो कैसे? उसका सबसे बड़ा दुश्मन बढ़ती महनगाई है!

केज़िरवाल जी आप अगर यह सोच रहे है की सिर्फ़ सि.एन.जी का दाम कम करने से समस्या का संधान हो गया, तो आप ग़लत है क्यूंकी समस्या का समाधान तो तब होगा जब इसका असर आम आदमी के जीवन मे दिखाई देगा! जब एक आम आदमी 100/- की कमाई मे भी कुछ रुपये आने वाले कल के लिए बचाने मे सकच्छम होगा!

राहुल गाँधी जी का कटक रैली भासन

आज के कटक रैली को संबोधित करते हुवे कांग्रेस के युवा नेता राहुल गाँधी जी ने अपने भासन मे कहते कहते यह कह दिया कि आज के युवाओं के पास रोज़गार नही है, ओड़ीसा राज्य मे सब कुछ है, लेकिन वहाँ का रुपैया जनता तक नही पहुँचता, एक-तिहाई आदमी ग़रीबी रेखा से नीचे है, लोगों को आर्थिक व्यवस्था नही मिल रहा है..! मैं राहुल जी से ये पूछना चाहता हूँ की भाई साहब अब तक देश की राजधानी सहित कई सहरों मे कॉंग्रेस के नेता रह चुकी है, वहाँ के जनता को क्या मिल रहा है, सिवाय भूख, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार  के? उन राज्यों मे कितने आदमी है जो ग़रीबी रेखा से नीचे है और शिक्षा की क्या आँकड़ा है रही है वहाँ? यही नही, राहुल जी कहते है की राज्यों मे अस्पताल है लेकिन डॉक्टर नही, विद्यालयों मे शिक्षक नही... अब राहुल साहब आप ही बताएँ की उन राज्यों मे गावों के विद्यालयों और अस्पतालों मे कितने शिक्षक और डॉक्टर है जहाँ कॉंग्रेस सरकार रही है??

केंद्र मे कॉंग्रेस सरकार रही है, इस विचार से तो पूरे देश मे शिक्षा, अस्पताल, रोज़गारों की कमी नही होनी चाहिए थी, फिर पूरा देश कॉंग्रेस को मूह के बल क्यू गिराने पर तुली हुवी है? अगर आप इसे कॉंग्रेस के खिलाफ जनता की कोई साजिश समझ रहे है, तो आपसे बड़ा नासमझ कोई नही होगा! कॉंग्रेस ने कुछ हो ना हो, ग़रीबों का खून चूस कर स्विश बॅंक भर लिया और एक बार डकार तक नही लिया! देश को ऐसा खोखला किया की लोग कॉंग्रेस शब्द पर थूकने को राज़ी नही! और केन्द्रा सरकार और देल्ही कॉंग्रेस सरकार का तो जवाब ही  नही, उसके बारे मे जितना कहा जाय, सयद कम ही होगा! राहुल जी, मेरा राय यह है की अब आप कॉंग्रेस को छोड़ कर कोई और पार्टी चुन ले, सयद आपको सफलता मिल जाए, क्यूँकी कॉंग्रेस की नाव तो कभी भी डूब सकती है!

Sunday, January 5, 2014

Chinese toys: attractive playing tool or exotic disease?

Chinese toys are exotic for the children and are easily available in all markets. These products are very attractive as well very cheap. Not only the children by themselves it preferred but also whenever they ask for a toy, we go for these Chinese items first. Nevertheless, for our household items too, we prefer these products. Have you ever thought why these products are so cheap, even those are so attractive and imported from China? Why they prefer to provide good functioning items in a cheap rate?

The answer is- using of bad quality of plastic materials and chemicals which results not only in toxic but also illness of children. Government of India has already prohibited these products in 2009 under the ITC code 9501, 9502 and 9503.

In a medical research, it has been found that the materials used in these Chinese toys results in inhale problems, cancer, weak memory power and similar to the children. They found availability of chemicals like sedative prodrugs. These chemicals results in slurred speech, staggering gait, poor judgment power, and slow, uncertain reflexes, indigestion etc.

Many people are not aware of these things and distributing unhealthy life to their kids in form of toys and other household items. Now we are living in a high society, focusing towards more healthy and hygienic life but still we are suffering from many diseases, have you ever think why? We are avoiding unhealthy foods but we are not taking care of those items which indirectly affect our health. Children even after getting healthy nutrients, many of them are incapable to their study or in taking decision. Day by day, they are lagging in their skills and health power.

Before choosing a Chinese item, think of yourself at least once, whether you are purchasing attractive toy for your kids or exotic diseases.

Saturday, January 4, 2014

Does Indian law capable to provide women security?

Now a days, every people have a same question in their mind- are women safe in this country? Is Indian law capable to punish the accused and have the capacity to provide a secured environment to women and common people here? If we discuss about last 10 years records, we cannot list out all those horrible problems those might happened with women, whether she was Indian or NRI or tourist. In 2011-12: the Guwahati molestation, 2012-13: Delhi gang rape in moving bus and Mumbai gang rape with journalist, 2013-14: Tahalka rape case, molestation by a justice, Kolkata rape case with a teenage, where the accused gang raped twice with the girl and burnt alive. Not only these, many such cases are in the scene those we cannot list out in detail.

Supreme Court started a fast track court for such cases, but regret to say that these fast track court too takes years to give their decision. Do you accept that this a really fast track? They have completely changed the meaning of fast track, I don’t know what is the meaning of this word in their dictionary? The big thing, if an accused is under 18 years, then maximum imprisonment is of three years only, whatever his/her offence is, whether he/she involved in gang rape case as in Delhi or in a murder case. The court guaranteed that they can change their character within three years of juvenile imprisonment. This indicates that, court has enough power to change behavior of a person. However till now I have not got any such example. Try and try, hope the court may succeed a day. Whatever the result will be till that day, nobody can explain. At the same time, it can be imagine that if a person can do such horrible offence in their teenage, what he/she will do later? That means, now it can predict that indirectly the law is providing criminals to the society.

Whatever the age the age of an accused is, the punishment should be always equivalent. There must not be a concept of juvenile court, especially for cases like rape, murder or similar big offence. If the court does not accept this, they must have to change their views, if they really want a peaceful environment. Think on it deeply, hope we can change this and can save women.